Nagaur Drug Factory: कहानी की शुरुआत एक नौकरी से होती है। राजस्थान का रहने वाला एक 28 वर्षीय युवक महावीर पहले नौकरी करता था, लेकिन उसकी कमाई बहुत कम थी। उसके मन में यह विचार आया कि इस तरह काम करने से पूरी जिंदगी ऐसे ही निकल जाएगी, इसलिए उसे कुछ बड़ा (Nagaur Drug Factory) और जल्दी पैसा कमाना है। रातों-रात अमीर बनने की इस चाहत ने उसका रास्ता पूरी तरह बदल दिया और उसने अपनी नौकरी छोड़कर अवैध रूप से करोड़ों रुपए कमाने का यह खतरनाक रास्ता चुन लिया।
किराए के मकान को बनाया नशे की फैक्ट्री
नागपुर पुलिस के अनुसार, महावीर ने एक किराए के मकान को कथित तौर पर नशे (MDMA) की फैक्ट्री बना दिया था। जब पुलिस ने वहां छापा मारा, तो बरामद सामान को देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। पुलिस के मुताबिक, मौके से 5.418 किलोग्राम MDMA, लगभग 2.744 किलोग्राम कैफीन, 24 प्रकार के अलग-अलग केमिकल और लगभग 210 लीटर लिक्विड केमिकल बरामद किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस अवैध सामग्री की कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
ऑनलाइन सीखी MDMA बनाने की तकनीक
जांच में यह सामने आया कि नागौर के लक्ष्मणपुरा कुचेरा का रहने वाला और फिलहाल दीप कॉलोनी में रहने वाला महावीर दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच MDMA बनाने की कोशिश कर रहा था। शुरुआत में वह असफल रहा, लेकिन उसने इंटरनेट और ऑनलाइन माध्यमों की मदद से इसे बनाने की पूरी जानकारी जुटाई। तरीका समझ आने के बाद उसने फरवरी 2026 में नौकरी छोड़कर नागौर के इस किराए के मकान में अवैध सेटअप तैयार कर लिया। बाहर से यह एक सामान्य मकान दिखता था, लेकिन अंदर नशा तैयार किया जा रहा था।
फैक्ट्री से मिले हाई-टेक उपकरण
पुलिस की छापेमारी में केवल नशीले पदार्थ ही नहीं, बल्कि इसे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई आधुनिक उपकरण भी बरामद हुए। इनमें मिक्सिंग मशीन, थर्मामीटर, मैग्नेटिक स्टेयरर, पीएच (pH) मीटर, ग्लास बीकर, कांच के जार, प्लास्टिक की कड़ाइयां और MDMA सुखाने के लिए बड़ी प्लेटें शामिल थीं। इससे साफ होता है कि यह कोई छोटा-मोटा या एक दिन में तैयार किया गया काम नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और व्यवस्थित सेटअप था।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और करोड़ों की बरामदगी
इस मामले में बड़ा मोड़ 10 अगस्त 2026 को आया, जब डीएसटी (DST) टीम को गुप्त सूचना मिली। नागौर की दीप कॉलोनी में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महावीर को गिरफ्तार किया और शुरुआती सामग्री जब्त की। इसके बाद तकनीकी जांच और पूछताछ के आधार पर जोधपुर रोड स्थित एक अन्य मकान का खुलासा हुआ। इस दूसरी जगह पर की गई दबिश ने पूरे मामले का दायरा ही बदल दिया, जहां से 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की सामग्री और ड्रग्स बरामद हुई।
बदलती पहचान और लगातार बदलते फोन नंबर
पुलिस की जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी महावीर के पास 10 से 12 मोबाइल सिम कार्ड थे। वह कभी भी लंबे समय तक एक ही सिम का इस्तेमाल नहीं करता था और हर 10 दिन के अंतराल पर अपनी सिम और नंबर बदल देता था ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेल में मुख्य फंडिंग किसकी थी, केमिकल कहां से मंगाए जाते थे और तैयार माल की सप्लाई किन-किन शहरों या देशों तक की जाती थी। इस मामले में महावीर के चार अन्य सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनसे पूछताछ कर पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। नागौर पुलिस इसे ‘ऑपरेशन नशा मुक्त नागौर’ के तहत एक बहुत बड़ी सफलता मान रही है।
