NEET UG Paper Leak: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर (NEET UG Paper Leak) सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के दावे के अनुसार, प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस से लीक नहीं हुआ था, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए काम करने वाले विषय विशेषज्ञों ने ही अपनी आधिकारिक पहुंच (एक्सेस) का दुरुपयोग करके पेपर लीक किया था। इस मामले की सुनवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी।
विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नपत्र की गोपनीयता का हनन
सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ है कि प्रश्नपत्र के गुप्त अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग की प्रक्रियाओं के दौरान विशेषज्ञों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। इस मामले में वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मांधारे, रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी (पी.वी. कुलकर्णी) और भौतिकी की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार की संलिप्तता सामने आई है। इन तीनों विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र से जुड़ी अत्यंत गोपनीय जानकारी लीक कर दी थी।
घर पर विशेष रिवीजन सेशन आयोजित कर मौखिक रूप से पढ़ाए गए प्रश्न
जांच में सामने आया है कि अप्रैल के महीने के दौरान पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा मांधारे ने पुणे स्थित अपने घरों पर गुप्त “विशेष रिवीजन सेशन” आयोजित किए थे। डिजिटल रिकॉर्ड न बने, इसके लिए इन सत्रों के दौरान प्रश्न, चारों विकल्प और सही उत्तर उम्मीदवारों को मौखिक रूप से पढ़ाए गए थे, जिसे उम्मीदवारों ने अपनी नोटबुक में हाथ से लिखा था। इसके अलावा, लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शितुरे के साथ मिलकर उम्मीदवारों को सिद्धि विनायक अस्पताल में बुलाकर पूरी प्रश्न बैंक याद करवा दी गई थी।
भौतिकी के प्रश्न वायरल और अस्पताल में याद कराई गई प्रश्न बैंक
भौतिकी की विशेषज्ञ मनीषा हवलदार ने पुणे में APMA के लेक्चरर तेजस हर्षदकुमार शाह के साथ प्रश्न साझा किए थे। शाह ने इन हस्तलिखित नोट्स की तस्वीरें खींचकर लातूर के रेणुकाई करियर सेंटर के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर को भेजी थीं, और शाह ने मनीषा हवलदार के पति के मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन पैसे भी ट्रांसफर किए थे। दूसरी ओर, नासिक के शुभम खैरनार ने गुरुग्राम के यश यादव को टेलीग्राम के माध्यम से पीडीएफ फॉर्मेट में प्रश्न भेजे थे, जिसे यश यादव ने जयपुर के मांगीलाल बिव्वाल को 10 से 12 लाख रुपये में बेच दिया था।
कोचिंग संस्थानों तक पहुंचा पेपर और बरामद हुए मजबूत सबूत
मांगीलाल द्वारा प्रश्नपत्र की प्रतियां छापकर उन्हें अपने परिवार के सदस्यों, स्थानीय कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थियों और निजी ट्यूटरों में बांट दिया गया था। सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (CFSL) द्वारा किए गए हस्ताक्षर विश्लेषण में जब्त की गई नोटबुक और 3 मई के वास्तविक प्रश्नपत्र के प्रश्न बिल्कुल समान पाए गए हैं। इसके साथ ही जांच एजेंसी ने डिजिटल लेनदेन के सबूत और डॉ. मनोज शितुरे के परिवार के पास से 5 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की है।
