Jamia controversial slogans: नई दिल्ली: दिल्ली स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’ के परिसर में दीवारों पर विवादित और आपत्तिजनक नारे लिखे जाने का मामला सामने आया है। दीवारों पर कश्मीर और 2020 दिल्ली दंगा मामले के आरोपी (Jamia controversial slogans) शरजील इमाम को ‘फ्री’ (रिहा) करने से जुड़े नारे पाए गए हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) के खिलाफ भी टिप्पणियां लिखी गई हैं। इन नारों के सामने आने के बाद परिसर में तनाव बढ़ गया है और ABVP ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कड़ी प्रतिक्रिया
घटना के तूल पकड़ने के बाद जामिया प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी कड़ी निंदा की है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया:
“जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में आपत्तिजनक ग्रैफिटी की घटना को गंभीरता से ले रहा है। यह कृत्य संस्थान के मूल्यों और शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल के प्रतिकूल है। मामले की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
छात्र संघ बहाली को लेकर पहले से जारी है धरना
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में 12 अक्टूबर से ही छात्र भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। जामिया में वर्ष 2006 से भंग छात्र संघ (Students’ Union) को दोबारा बहाल करने और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर यह आंदोलन चल रहा है। इस संबंध में प्रशासन ने हाल ही में एक समिति का भी गठन किया था।
पृष्ठभूमि: शरजील इमाम पर दर्ज मामले
दीवारों पर जिस शरजील इमाम के समर्थन में नारे लिखे गए हैं, वह फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद है।
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आरोप: अभियोजन पक्ष के अनुसार, शरजील इमाम पर दिसंबर 2019 में जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में भड़काऊ भाषण देने और पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से अलग करने की धमकी देने का आरोप है।
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नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध के दौरान भड़की हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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हाल ही में अदालत ने पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शरजील को कुछ दिनों की अंतरिम जमानत दी थी।
इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी शरजील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में इसी प्रकार के प्रदर्शन और नारे देखने को मिले थे। जामिया प्रशासन फिलहाल परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा है ताकि दीवारों पर ग्रैफिटी बनाने वालों की पहचान की जा सके।
