गेम की लत या ‘स्क्रीन एडिक्शन’ का जहर? भाई ने फोन लेकर स्कूल भेजा, तो गुस्से में पानी की टंकी पर जा चढ़ा मासूम।

Child Mobile Addiction: महाराष्ट्र के संभाजीनगर में मोबाइल से जुड़ी दर्दनाक घटना की यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि मध्य प्रदेश के श्योपुर…

Child Mobile Addiction: महाराष्ट्र के संभाजीनगर में मोबाइल से जुड़ी दर्दनाक घटना की यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि मध्य प्रदेश के श्योपुर से एक हैरान कर (Child Mobile Addiction) देने वाला मामला सामने आया है। बड़े भाई द्वारा मोबाइल छीनकर स्कूल भेजने से नाराज एक 12 साल का बच्चा 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर जा चढ़ा। टंकी की मुंडेर पर बैठकर बच्चे की जिद ने परिजनों और स्थानीय लोगों की सांसें अटका दी थीं।

मोबाइल गेम की जिद और टंकी पर चढ़ाई
दरअसल, श्योपुर शहर के खातौली रोड निवासी 12 वर्षीय बच्चा मंगलवार सुबह स्कूल जाने के बजाय घर पर बैठकर मोबाइल में गेम खेल रहा था। काफी देर तक जब उसने फोन नहीं छोड़ा, तो बड़े भाई ने उसे डांटते हुए हाथ से मोबाइल छीन लिया और तुरंत स्कूल जाने की हिदायत दी। बड़े भाई की इस बात से नाराज होकर बच्चा गुस्से में घर से निकला और पास ही बनी 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर जा पहुंचा।

डेढ़ घंटे तक अटकी रहीं सांसें
अचानक बच्चे को इतनी अधिक ऊंचाई पर बैठे देख नीचे मौजूद परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। परिजनों ने हाथ जोड़कर और गिड़गिड़ाकर उसे नीचे उतरने के लिए मनाया, लेकिन बच्चा टस से मस नहीं हुआ। करीब डेढ़ घंटे तक वह टंकी की मुंडेर पर ही बैठा रहा, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और हर किसी की सांसे अटकी रहीं।

पुलिस की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने तुरंत सिटी कोतवाली पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सत्यम गुर्जर पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कोई जल्दबाजी करने के बजाय बेहद धैर्य और सूझबूझ से काम लिया। अधिकारियों ने बच्चे से बहुत नरमी से बातचीत की और उसे भरोसा दिलाया कि नीचे आने पर उसे कोई डांट नहीं पड़ेगी। पुलिस की इस समझाइश और प्यारभरे प्रयासों के रंग लाने पर आखिरकार बच्चा सुरक्षित नीचे उतर आया, जिससे सभी ने राहत की सांस ली।

बाल मनोवैज्ञानिकों की चेतावनी: स्क्रीन एडिक्शन का गंभीर खतरा
बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना केवल एक बच्चे के सामान्य गुस्से का मामला नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी में ‘स्क्रीन एडिक्शन’ (मोबाइल की लत) से उपजी गंभीर मानसिक स्थिति की ओर एक बड़ा इशारा करती है। घंटों मोबाइल स्क्रीन पर गेमिंग और रील्स देखने से बच्चों के मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर तेजी से प्रभावित होता है। यही वजह है कि जब अचानक उनसे उनका फोन ले लिया जाता है, तो वे अत्यधिक आक्रामक या खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर हो जाते हैं।