UPI Charges 2026: देशभर में यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने के सरकार और एनपीसीआई (NPCI) के फैसले के खिलाफ अब व्यापारियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशनों (UPI Charges 2026) का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तराखंड तक कई बाजारों और सीएनजी-पेट्रोल पंपों पर “नो यूपीआई, ओनली कैश” (No UPI, Only Cash) के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं, जिससे डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है।
दिल्ली-एनसीआर में व्यापारियों और पेट्रोल पंपों का प्रदर्शन
दिल्ली के कश्मीरी गेट मार्केट और ग्रेटर नोएडा के कई सीएनजी पंपों पर दुकानदारों ने यूपीआई पर लगने वाले संभावित चार्ज के विरोध में तख्तियां लगा दी हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के नेतृत्व में व्यापारियों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह फैसला देश की ‘डिजिटल इंडिया’ मुहिम को बड़ा झटका दे सकता है। पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि कम मार्जिन के चलते वे इस अतिरिक्त बोझ को नहीं उठा सकते, जिससे मजबूरन उन्हें ग्राहकों से केवल नकद (Cash) या कार्ड से भुगतान स्वीकार करने की अपील करनी पड़ रही है।
उत्तराखंड में भी रोष और व्यापारियों का कड़ा रुख
पहाड़ी राज्यों में भी इस फैसले को लेकर खासा असंतोष देखने को मिल रहा है। दून उद्योग व्यापार मंडल और पलटन बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष पारस गुप्ता ने दो टूक कहा कि व्यापारी पहले से ही जीएसटी (GST) और इनकम टैक्स का भारी भरकम भुगतान कर रहे हैं। सरकार के कहने पर पारदर्शिता लाने के लिए उन्होंने डिजिटल पेमेंट अपनाई थी, लेकिन अब केवल कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत थोपी गई तो वे इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे।
क्या है नया यूपीआई एमडीआर (MDR) फ्रेमवर्क?
एनपीसीआई (NPCI) द्वारा जारी किए गए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का चार्ज (MDR) लगाया जाएगा, जिसकी प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। हालांकि ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल मुफ्त बना रहेगा, लेकिन दुकानदारों और व्यापारियों पर आने वाले इस आर्थिक बोझ के कारण ही यह पूरा विवाद गहराया है, जो 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होना है।
