लाल किला ब्लास्ट: UN रिपोर्ट में अल-कायदा का हाथ, आतंकियों ने बम बनाने के लिए किया AI और ChatGPT का इस्तेमाल

UN Report Terrorism: संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की जांच में पिछले साल नवंबर में दिल्ली के लाल किले…

UN Report Terrorism: संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की जांच में पिछले साल नवंबर में दिल्ली के लाल किले पर हुए भीषण आतंकी (UN Report Terrorism) हमले को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस हमले के लिए आधिकारिक तौर पर अल-कायदा से जुड़े संगठन को जिम्मेदार ठहराया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • घटना: 10 नवंबर 2025 को लाल किले पर भीषण IED कार धमाका, जिसमें 11 लोगों की जान गई।

  • जिम्मेदार संगठन: ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS)।

  • चार्जशीट: NIA द्वारा 14 मई को 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल।

  • नया खतरा: ‘टेरर इंजीनियरिंग’ के तहत आतंकियों द्वारा बम बनाने के लिए AI (ChatGPT) और YouTube का इस्तेमाल।

यूएन रिपोर्ट: हमले का मास्टरमाइंड है AQIS

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, लाल किले पर हुए इस जानलेवा धमाके के पीछे सीधे तौर पर AQIS का हाथ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह संगठन अब विकेंद्रीकरण (decentralization) की रणनीति अपना रहा है। बड़े गुटों के बजाय यह छोटे-छोटे समूहों (सेल्स) में बंटकर अपना वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क बहुत तेजी से फैला रहा है। साथ ही, यह चिंता भी जताई गई है कि AQIS अब बांग्लादेश में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है।

एनआईए जांच: ‘लेबोरेटरी-ग्रेड’ बम और एआई का दुरुपयोग

एनआईए की 7,500 पन्नों की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आतंकियों ने बम बनाने और इस्तेमाल करने के लिए बेहद सटीक और “लेबोरेटरी-ग्रेड” तकनीक अपनाई थी।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल: मामले का एक मुख्य आरोपी जासिर बिलाल वानी (जो AQIS से जुड़े मॉड्यूल ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ का “इन-हाउस इंजीनियर” है) ने रॉकेट IED बनाने के लिए YouTube और ChatGPT का सहारा लिया। उसने AI के जरिए यह पता लगाया कि रॉकेट कैसे बनाया जाए और उसमें विस्फोटकों का सही अनुपात क्या होना चाहिए।

  • जंगलों में हुई टेस्टिंग: जासिर ने अन्य साथियों के साथ मिलकर रॉकेट IED तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले स्थित काजीगुंड के जंगलों में उनका सफल परीक्षण भी किया।

साजिश में प्रोफेशनल्स की एंट्री: 3 डॉक्टर भी निकले आरोपी

इस आतंकी साजिश में हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम भी जांच के दायरे में आया है। जासिर ने तकनीकी मदद के इरादे से 2024-25 के दौरान कई बार इस यूनिवर्सिटी कैंपस का दौरा किया था। जांच में यूनिवर्सिटी से जुड़े 3 डॉक्टरों की सीधी भूमिका सामने आई है:

  • डॉ. उमर-उन-नबी: यह इस मामले का मुख्य आरोपी है। इसी ने विस्फोटकों से भरी कार को लाल किले तक चलाया था। आरोप है कि इसने रॉकेट IED पर रिसर्च भी की थी।

  • डॉ. अदील अहमद राथर: इसी डॉक्टर ने जासिर की मुलाकात डॉ. उमर से करवाई थी। अदील ने बम बनाने का कच्चा माल (जैसे NPK फर्टिलाइजर, पोटेशियम नाइट्रेट और पिसी हुई चीनी) सप्लाई करने में अहम भूमिका निभाई थी।

  • डॉ. मुजम्मिल शकील: यह भी एक सह-आरोपी है, जो जासिर और डॉ. उमर के साथ रॉकेट IED बनाने और काजीगुंड में उसकी टेस्टिंग करने में शामिल था।

गृह मंत्रालय भारत में पहले ही AQIS और उसकी सभी शाखाओं को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। एनआईए की यह चार्जशीट आतंकवाद में तकनीक और प्रोफेशनल्स के बढ़ते गठजोड़ की ओर एक गंभीर इशारा करती है।