‘आपदा में अवसर’ या गरीबी की लाचारी? मुरादाबाद में सड़क पर बहता देसी घी समेटने के लिए इंसानियत भूले लोग

Desi Ghee Truck Accident: मुरादाबाद हाईवे पर जब देसी घी से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलटा, तो वहां चीख-पुकार मचने के बजाय एक अजीब…

Desi Ghee Truck Accident: मुरादाबाद हाईवे पर जब देसी घी से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलटा, तो वहां चीख-पुकार मचने के बजाय एक अजीब सा नजारा देखने को मिला। ट्रक के पलटते ही उसमें रखा कीमती देसी घी सड़क पर बहने लगा। दुर्घटना की खबर मिलते ही (Desi Ghee Truck Accident) आस-पास के गांवों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग अपने घरों से बाल्टी, डिब्बे, जग और जो भी बर्तन हाथ लगा, उसे लेकर सड़क पर बिखरे घी को बटोरने की होड़ में लग गए। देखते ही देखते हाईवे का वह हिस्सा एक संघर्ष क्षेत्र में बदल गया, जहां हर कोई ज्यादा से ज्यादा घी समेट लेना चाहता था।

गरीबी और लाचारी का कड़वा सचइस पूरे घटनाक्रम को देखकर सबसे पहला विचार जो मन में आता है, वह है देश के एक बड़े हिस्से में फैली आर्थिक तंगी। भारतीय समाज में ‘देसी घी’ को न केवल सेहत के लिए बल्कि संपन्नता का प्रतीक भी माना जाता है, क्योंकि इसकी कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ती हैं। जब लोगों को यह कीमती चीज सड़क पर मुफ्त में बहती हुई दिखी, तो वे अपनी जान और आत्मसम्मान को भूलकर उसे उठाने में लग गए। यह दृश्य इस बात का जीता-जागता सबूत है कि गरीबी की मार कितनी गहरी है, जहाँ लोग गंदगी और सड़क के खतरों की परवाह किए बिना चंद रुपयों का सामान बचाने की जद्दोजहद में जुट जाते हैं।

‘आपदा में अवसर’ और सामाजिक मानसिकताऐसी घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं; देश के अलग-अलग हिस्सों से अक्सर तेल, दूध, प्याज या अन्य खाद्य पदार्थों से भरे ट्रकों के पलटने पर ऐसी ही तस्वीरें सामने आती हैं। यह स्थिति समाज में ‘आपदा में अवसर’ तलाशने की उस मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ किसी की दुर्घटना दूसरों के लिए फायदे का सौदा बन जाती है। ऐसे समय में मानवीय संवेदनाएं कहीं पीछे छूट जाती हैं और लोग घायल ड्राइवर की मदद करने के बजाय बिखरे हुए माल को समेटने में अधिक रुचि दिखाने लगते हैं।

सुरक्षा और स्वच्छता की अनदेखीइस तरह की लूटपाट में लोग कानून-व्यवस्था और अपनी सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख देते हैं। व्यस्त हाईवे पर इस तरह की भगदड़ से अन्य दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, सड़क पर धूल, मिट्टी और कांच के टुकड़ों के बीच से बटोरा गया यह घी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है, लेकिन चंद पैसों की बचत के आगे लोग इस गंभीर खतरे को भी नजरअंदाज कर देते हैं।

मुरादाबाद हाईवे की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आर्थिक असमानता आज भी कितनी बड़ी चुनौती है। जब तक समाज के निचले तबके तक बुनियादी संसाधनों की पहुंच आसान नहीं होगी, तब तक सड़क पर बिखरे घी को समेटने की यह लाचारी हमें समय-समय पर झकझोरती रहेगी। यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक ऐसा आईना है, जिसमें विकास के दावों के बीच छिपी गरीबी की हकीकत साफ दिखाई देती है।