Indore Lokayukta Raid: इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई से नगर निगम महकमे में हड़कंप मच गया है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर छापेमारी की है। प्रारंभिक (Indore Lokayukta Raid) जांच में यह बात सामने आई है कि 31 साल की नौकरी के दौरान उन्हें कुल करीब 80 लाख रुपये वेतन मिला, जबकि उनके और उनके परिवार के नाम पर संपत्तियों व खर्चों का मूल्यांकन 2.53 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया है। इसी आधार पर लोकायुक्त ने अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
एक साथ दो ठिकानों पर छापेमारी
लोकायुक्त को मिली गुप्त शिकायत के आधार पर गुरुवार को इंदौर में सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय से जुड़े दो अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की गई। डीएसपी सुनील तालान और डीएसपी आनंद चौहान के नेतृत्व में लोकायुक्त की टीम सुबह से ही दस्तावेजों, बैंक खातों और चल-अचल संपत्तियों की सघन जांच में जुटी हुई है।
पत्नी के नाम करोड़ों की संपत्तियां और मकान
जांच के दौरान लोकायुक्त टीम को आरोपी अधिकारी की पत्नी के नाम पर भारी-भरकम संपत्तियों का खुलासा हुआ है:
पहला मकान: पत्नी के नाम 40×50 फीट के प्लॉट पर एक आलीशान G+3 मकान मिला है, जिसके निर्माण पर लगभग 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दूसरा भवन: गजाधर नगर में पत्नी के नाम पर एक अन्य प्लॉट पर G+2 भवन मिला है, जहां वर्तमान में एक छात्रावास (हॉस्टल) संचालित किया जा रहा है। इस भवन के निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
वाहन और अन्य खर्च
लोकायुक्त की अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकारी ने अपनी पत्नी, बेटे और बेटी के नाम पर कई वाहन खरीदे हैं। वाहन खरीद और अन्य जीवनशैली से जुड़े खर्चों में करीब 14 लाख रुपये का निवेश किया गया है। फिलहाल जांच दल इन सभी निवेशों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करने में जुटा है।
आय से 1.73 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति का दावा
लोकायुक्त के आंकड़ों के अनुसार, जितेंद्र कुमार पांडेय को 31 वर्षों की सेवा के दौरान कुल लगभग 80 लाख रुपये का वेतन मिला। इसके मुकाबले उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों और कुल खर्च का मूल्य करीब 2.53 करोड़ रुपये आंका गया है। इस प्रकार, वैध आय की तुलना में लगभग 1.73 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति और खर्च सामने आया है, जो आय से 216 प्रतिशत अधिक है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
प्रारंभिक साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर लोकायुक्त ने इसे अनुपातहीन संपत्ति का गंभीर मामला मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत केस दर्ज कर लिया है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि परिसरों में सर्चिंग और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है, और जांच पूरी होने के बाद आय के वास्तविक स्रोतों व अन्य संपत्तियों को लेकर और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
