सात जन्मों का साथ, अंतिम सफर भी एक संग: डेंगू से पति की मौत के चंद घंटों बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम, पूरे गांव में पसरा मातम।

Mainpuri Dengue Death: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक ही परिवार की खुशियां कुछ ही पलों में मातम में बदल गईं। डेंगू की चपेट…

Mainpuri Dengue Death: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक ही परिवार की खुशियां कुछ ही पलों में मातम में बदल गईं। डेंगू की चपेट में आने से 48 वर्षीय मुकेश कुमार (Mainpuri Dengue Death) की मौत हो गई। पति की मौत का गहरा सदमा उनकी पत्नी बर्दाश्त नहीं कर सकीं और महज चार घंटे बाद 42 वर्षीय पत्नी दीपा ने भी दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

एलाऊ थाना क्षेत्र के कसद गांव की घटना
यह पूरा मामला मैनपुरी जिले के एलाऊ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसद गांव का है। मुकेश कुमार खेती-बाड़ी करके अपने हंसते-खेलते परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में पत्नी दीपा और चार बच्चे (तीन बेटे और एक बेटी) शामिल हैं। परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अक्टूबर के महीने में अचानक इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

अक्टूबर में बिगड़ी तबीयत, आगरा में चल रहा था इलाज
गत 19 अक्टूबर को मुकेश कुमार को अचानक तेज बुखार आया, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें आगरा रेफर कर दिया। आगरा में हुई जांच के दौरान उनके डेंगू से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। दूसरी ओर, उनकी पत्नी दीपा भी बुखार से पीड़ित थीं और उनका इलाज आगरा के ही एक अन्य अस्पताल में चल रहा था। इस तरह पति-पत्नी दोनों अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे।

कुछ ही घंटों के अंतराल में उजड़ गया पूरा परिवार
बुधवार की रात करीब साढ़े नौ बजे इलाज के दौरान मुकेश कुमार की सांसें थम गईं। घर के मुख्य मुखिया और एकमात्र सहारे की मौत की खबर ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल में भर्ती और बीमारी से जूझ रही दीपा तक जब उनके पति के निधन की मनहूस खबर पहुँची, तो वह इस सदमे को सहन नहीं कर पाईं। पति की मौत के महज चार घंटे बाद दीपा ने भी दम तोड़ दिया। हालांकि, दीपा की मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार, चार बच्चों के सिर से उठा साया
गुरुवार को जब मुकेश और दीपा के शव उनके पैतृक गांव कसद पहुंचे, तो हर आंख नम हो गई। ग्रामीणों की भीड़ जुटी और पूरे गांव में मातम पसर गया। इस अप्रत्याशित और भीषण त्रासदी का सबसे गंभीर असर उनके चार मासूम बच्चों पर पड़ा है, जिनके सिर से एक ही रात में माता-पिता दोनों का साया हमेशा के लिए उठ गया।

गुरुवार की शाम गांव से दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई और इसके बाद पति-पत्नी का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। जिन जीवनसाथियों ने ताउम्र साथ निभाने की कसमें खाई थीं, उनका अंतिम सफर भी एक साथ ही समाप्त हुआ।