गंगूबाई भले ही वेश्या रही हो, लेकिन आज भी इस मंदिर में उसकी मूर्ति के आगे चढ़ता है प्रसाद और आरती

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संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। इसमें वैश्यालय के मालिक की वास्तविकता दिखाई गई है। मुंबई के रेड लाइट जिले की लंबे समय से मृत रानी की गरिमा की रक्षा के लिए लड़ रही गंगूबाई की कहानी दिखाई गई है।

रिलीज हो चुकी फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी में अभिनेत्री का रोल आलिया भट्ट को दिया गया है। कमाठीपुरा के सबसे ताकतवर वेश्यालय की मालिक की गलियों में कुछ साल पहले तक देह व्यापार फलता फूलता था। आल्हा के आज के कमाठीपुरा में देह व्यापार कूची गलियों में सीमित है लेकिन जनता की चिकन आसान है इस एक अलग ही रूप दे दिया है।

फिल्म रिलीज होने से पहले कुछ लोगों ने इस फिल्म का विरोध भी किया था वह फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की थी।उसकी बेटी बबीता का कहना है कि हम अपनी मां की गरिमा के लिए लड़ रहे हैं। फिल्म में तथ्यात्मक गलतियां है। हम फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।

कामाठीपुरा इतने शिक्षित लोगों के साथ एक नया जीवन जी रहा है और संजय लीला भंसाली आज का कामाठीपुरा क्यों नहीं दिख रहा और बदनाम कामाठीपुरा की फिल्म क्यों बना रहा है ऐसा विरोध करते हुए कहा।8 सितंबर 1977 को गंगूबाई का निधन हो गया था। फिर गंगूबाई को कामाठीपुरा की गलियों से ले जाया गया। उसके घर में 200 लड़कियों का समावेश हो उतनी जगह थी।

एक औरत ने गंगूबाई की तस्वीर अपने घर में लगाई है और वह बोलती है कि सिर्फ मंगू भाई मेरे भगवान है। और यह औरत हर रोज सुबह और शाम गंगूबाई की आरती करती है।इसलिए लोक मान्यता है कि यह औरत ने अपने घर के अंदर गंगूबाई का मंदिर बना दिया है और वह गंगूबाई की पूजा करती है और हर साल गंगूबाई के जन्मदिन पर कहीं बच्चों को खाना भी खिलाती है।