Ajmer GRP Missing Children: राजस्थान के अजमेर में रेलवे पुलिस ने वर्षों पहले लापता हुए बच्चों की तलाश के लिए एक बेहद संवेदनशील और आधुनिक कदम उठाया है। अजमेर (Ajmer GRP Missing Children) राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उन बच्चों के बड़े होने पर उनके संभावित चेहरे तैयार कराए हैं, जो सालभर पहले रेलवे स्टेशन की भीड़ में अपने परिवारों से बिछड़ चुके थे। पुलिस का यह प्रयास उन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो बरसों से अपने जिगर के टुकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
लापता बच्चों की दास्तान और AI तकनीक का सहारा
समय के साथ बच्चों के चेहरे और उनकी शारीरिक बनावट बदल जाती है, जिससे बचपन की तस्वीरों के जरिए बरसों बाद उनकी पहचान करना असंभव सा हो जाता है। इसी चुनौती से पार पाने के लिए अजमेर जीआरपी ने AI सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए बच्चों की पुरानी और बचपन की तस्वीरों के आधार पर उनके मौजूदा उम्र के संभावित चेहरे तैयार करवाए हैं। पुलिस ने 22 अक्टूबर को इन तस्वीरों को सार्वजनिक किया है, ताकि इन्हें देखकर कोई इनकी पहचान कर सके और जांच को आगे बढ़ाया जा सके।
मोहम्मद इमरान की कहानी: 16 साल का लंबा इंतजार
पहली कहानी मोहम्मद इमरान की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 13 मई 2010 को हैदराबाद के रहने वाले 65 वर्षीय मोहम्मद युसुफ अपने परिवार के साथ अजमेर आए थे। यात्रा के बाद जब परिवार वापस लौट रहा था, तब अजमेर रेलवे स्टेशन की भारी भीड़ में उनका 8 वर्षीय नाती इमरान अचानक गायब हो गया। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। आज 16 साल बीत जाने के बाद इमरान लगभग 23 वर्ष का हो चुका होगा। बचपन की तस्वीर के धुंधला जाने के कारण पुलिस ने AI के जरिए उसके वर्तमान संभावित चेहरे को तैयार किया है।
इमरान की शारीरिक पहचान और निशान
लापता व्यक्ति की तलाश में केवल तस्वीर ही नहीं, बल्कि शारीरिक विशेषताएं भी बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इमरान का शरीर इकहरा और त्वचा का रंग सांवला है। उसके दाहिने हाथ की कलाई पर एक मस्सा था और बचपन में सिर पर चोट लगने के कारण टांके भी लगे थे। इसके अलावा, बोलते समय वह तुतलाता था। ये सभी पहचान आज भी उसकी तलाश में मददगार साबित हो सकती हैं, हालांकि इतने वर्षों में इनमें कितना बदलाव आया होगा, यह कहना मुश्किल है।
उस्मान की कहानी: मां की आंचल से बिछड़ा मासूम
दूसरी कहानी उस्मान से जुड़ी है। साल 2014 में उस्मान अपनी मां नजमा के साथ जयपुर से अजमेर आया था। 29 अप्रैल 2014 को दोपहर करीब 3:45 बजे अजमेर रेलवे स्टेशन पर वह अपनी मां से बिछड़ गया। उस समय उस्मान की उम्र महज 5 साल 6 महीने थी। आज वह लगभग 17 वर्ष का एक किशोर बन चुका होगा। 11 साल से अधिक के इस लंबे अंतर को पाटने और उसके आज के स्वरूप का अनुमान लगाने के लिए पुलिस ने AI तकनीक की मदद से उसकी भी नई संभावित तस्वीर तैयार कराई है।
उस्मान के चेहरे और पहचान के खास संकेत
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस्मान का रंग गोरा, चेहरा गोल और शरीर इकहरा है। उसकी आंखों में हल्का भेंगापन भी दर्ज है, जो उसकी पहचान का एक अहम संकेत हो सकता है। पुलिस ने उसकी बचपन की तस्वीर के साथ इस संभावित नए चेहरे को भी आम जनता के बीच साझा किया है ताकि यदि कोई उसे जानता हो या उसके साथ रहा हो, तो वह पुलिस तक सही जानकारी पहुंचा सके।
एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ती पुलिस की कोशिश
बच्चों के लापता होने के मामलों में समय सबसे बड़ी बाधा बनता है। अजमेर जीआरपी की यह पहल अपनी तरह की पहली ऐसी कोशिश है, जिसमें तकनीक का सहारा लेकर बरसों पुराने मामलों को सुलझाने की राह खोजी जा रही है। इमरान को खोए हुए 16 साल और उस्मान को बिछड़े हुए 12 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। पुलिस का यह सराहनीय कदम शायद उन दो अभागे परिवारों के अंतहीन इंतजार को खत्म कर सके और उन्हें उनके अपनों से मिला सके।
