3 साल बाद फिर से बढ़ा रेपो रेट: कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर अब आपकी ईएमआई (EMI) पर!

RBI Repo Rate Hike: वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को…

RBI Repo Rate Hike: वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को नियंत्रित (RBI Repo Rate Hike) रखने के लिए एक अहम फैसला लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी अक्टूबर नीति समीक्षा में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की वृद्धि कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद अब नीतिगत रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। दरें बढ़ने से बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा और होम लोन, कार लोन तथा पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ सकती है।

ब्याज दरों में फेरबदल: अन्य प्रमुख दरों का नया दायरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि देश की मौजूदा वित्तीय और आर्थिक स्थितियों की गहन समीक्षा के बाद एमपीसी (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.50% करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, अन्य प्रमुख दरों को भी समायोजित किया गया है, जिसके तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.25% पर स्थिर रखा गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट बढ़कर अब 5.75% हो गए हैं।

वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बनी हुई है भारतीय अर्थव्यवस्था
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी आंतरिक मजबूती का प्रदर्शन किया है और देश की आर्थिक गतिविधियों में निरंतर व्यापक सुधार और तेजी देखने को मिल रही है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन बाहरी दबावों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था भविष्य में भी अपनी रफ्तार और स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है।

तीन साल बाद रिजर्व बैंक ने उठाया ब्याज दरें बढ़ाने का कदम
गौरतलब है कि फरवरी 2023 के बाद यह पहला अवसर है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रुख अपनाया है। इसके विपरीत, वर्ष 2025 के दौरान महंगाई दर में नरमी और राहत को देखते हुए आरबीआई ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। हालांकि, हालिया समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने केंद्रीय बैंक को महंगाई पर लगाम कसने के लिए एक बार फिर सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों का भी रहा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा लिए गए हालिया निर्णयों का भी संज्ञान लिया होगा। विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का प्रभाव इस फैसले पर देखा जा सकता है। पिछले महीने ही अमेरिकी फेड ने महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अपनी मुख्य ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की थी, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने भी दरों में इजाफा किया था। लगातार बढ़ती ऊर्जा और तेल की कीमतों के चलते वैश्विक स्तर पर बढ़ते महंगाई के दबाव ने भारतीय केंद्रीय बैंक को यह नीतिगत बदलाव करने के लिए प्रेरित किया है।