सेंसेक्स 1000 और निफ्टी 300 अंक टूटा, सोना-चांदी भी धड़ाम; जानें गिरावट की बड़ी वजहें

Stock Market Crash: आज सोमवार का दिन निवेशकों के लिए किसी ‘ब्लैक सोमवार’ से कम साबित नहीं हो रहा है। वीकेंड के बाद कारोबार के…

Stock Market Crash: आज सोमवार का दिन निवेशकों के लिए किसी ‘ब्लैक सोमवार’ से कम साबित नहीं हो रहा है। वीकेंड के बाद कारोबार के पहले ही दिन, चाहे सेंसेक्स (Stock Market Crash) हो या निफ्टी, सोना हो या चांदी—हर तरफ भारी गिरावट का दौर देखने को मिला। सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक और निफ्टी 300 से ज्यादा अंकों तक टूट गया। वहीं, एक ही दिन में सोना 4,500 रुपये और चांदी 8,000 रुपये से अधिक सस्ती हो गई, जिससे निवेशकों में भारी डर का माहौल है और बाजार में अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। आखिर इस बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।

निफ्टी 28 महीने के निचले स्तर पर
तकनीकी दृष्टिकोण से निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट माना जा रहा था, लेकिन सोमवार को निफ्टी 300 से अधिक अंकों के गोते लगाते हुए 22,807 के स्तर पर आ गया। गौरतलब है कि मई 2024 में भी निफ्टी इसी स्तर पर था, यानी पिछले 28 महीनों से बाजार एक ही दायरे में फंसा हुआ है और कोई खास रिकवरी देखने को नहीं मिली है।

इसी साल जनवरी के महीने में निफ्टी ने 26,373.20 का अपना ऑल-टाइम हाई स्तर छुआ था, जहाँ से अब तक यह लगभग 15% नीचे आ चुका है। दूसरी ओर, सेंसेक्स भी 1,000 से अधिक अंकों की भारी गिरावट के साथ 73,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। डायरेक्ट स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड या ईटीएफ में पैसे लगाने वाले निवेशकों का अब धैर्य जवाब दे रहा है।

महाराष्ट्र में भीषण सूखे की घोषणा से हलचल
वैश्विक कारणों के अलावा, भारतीय बाजार में तूफान लाने का एक मुख्य कारण देश के भीतर की एक बड़ी रिपोर्ट भी है। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कुल 358 में से 265 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त (Drought-hit) घोषित कर दिया है। इस फैसले से राज्य का लगभग 74% हिस्सा प्रभावित हुआ है। मानसून के दौरान लगातार 21 दिनों से अधिक समय तक बारिश न होने (ट्रिगर-1 मानदंड) और खरीफ फसलों को हुए भारी नुकसान के चलते यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा है।

इस घोषणा से कपास, सोयाबीन, तुअर, मूंग, उड़द, गन्ने, प्याज, हरी मिर्च और टमाटर के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा। सोयाबीन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा, मवेशियों के लिए हरे चारे और पानी की भारी किल्लत से दूध और चारे के दाम महंगे होने का डर पैदा हो गया है, जिससे महंगाई की चिंता और बढ़ गई है।

बाजार में भारी गिरावट के 4 मुख्य वैश्विक कारण
अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज संकट: अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव चरम सीमा पर पहुँच गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के प्रस्तावों को ठुकराए जाने से पश्चिम एशिया में भारी अस्थिरता है। ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका ने घरेलू और वैश्विक बाजार का मूड बिगाड़ दिया है।

क्रूड ऑयल 105 डॉलर के पार: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम उछलकर 105 प्रति बैरल के पार पहुँच गए हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगाई और व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को डरा दिया है।

FIIs की भारी बिकवाली: वैश्विक अनिश्चितताओं, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकालकर सुरक्षित एसेट्स (जैसे सोना और अमेरिकी बॉन्ड) की तरफ रुख कर रहे हैं।

यूएस फेड का सख्त रुख और India VIX में 14% का उछाल: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों और महंगाई को लेकर कड़े तेवर अपनाने से ग्लोबल मार्केट में कमजोरी आई है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय बाजार में बैंकिंग, ऑटो और स्मॉल/मिडकैप जैसे प्रमुख सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई। इस डर के माहौल के कारण इंडिया विक्स (India VIX – वोलैटिलिटी इंडेक्स) में 14% की भारी तेजी दर्ज की गई है, जो बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव तथा डर का संकेत देता है।