Madhya Pradesh Flood: मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में करीब 14 घंटे तक लगातार हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई। चित्रकूट में मंदाकिनी (Madhya Pradesh Flood) नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट समेत कई इलाके जलमग्न हो गए, जबकि सतना के कोटर, बिरसिंहपुर और कोठी क्षेत्र में सेमरावल नदी उफान पर आ गई। पानी गांवों और घरों में घुसने के बाद प्रशासन और राहत दलों ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया।
प्रशासन के मुताबिक, अब तक जिलेभर में करीब 700 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन पीछे तबाही के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। मकानों और दुकानों को नुकसान पहुंचने के साथ सड़क, पुल और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। अब प्रशासन के सामने प्रभावित इलाकों में जनजीवन सामान्य करने और संपर्क व्यवस्था बहाल करने की बड़ी चुनौती है।
मंदाकिनी के तेज बहाव में बहा 300 मीटर लंबा पुल
चित्रकूट में बाढ़ का सबसे भयावह मंजर रामघाट क्षेत्र में देखने को मिला। मंदाकिनी नदी पर बना करीब 42 साल पुराना और लगभग 300 मीटर लंबा पुल तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। पानी कम होने के बाद पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से और आसपास जमा मलबे ने बाढ़ की भयावहता को उजागर कर दिया।
रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, बाजार, खटकाना, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। कई जगह पानी दो मंजिला मकानों तक पहुंच गया, जिसके चलते लोगों को मजबूरी में छतों पर शरण लेनी पड़ी।
मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित करीब 400 दुकानें भी बाढ़ की चपेट में आ गईं। पानी और कीचड़ भरने से दुकानों और घरों में रखा राशन, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और अन्य सामान खराब हो गया। वहीं, सती अनसूया, गुप्तगोदावरी और स्फटिक शिला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल भी बाढ़ से प्रभावित हुए।
SDRF और राहत दलों ने संभाला मोर्चा
बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF समेत अन्य राहत दलों ने मोटरबोट की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया। शनिवार देर रात तक करीब 650 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया।
चित्रकूट स्थित शिवहरे धर्मशाला में चातुर्मास के लिए ठहरे करीब 50 लोगों के दल में शामिल बिहार निवासी कमला शरण भी बाढ़ के पानी में फंस गईं। पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
सतना में सेमरावल नदी ने मचाई तबाही
सतना जिले के कोटर क्षेत्र में सेमरावल नदी के उफान ने कई गांवों की मुश्किलें बढ़ा दीं। ऊधव धाम के पास पुल के ऊपर करीब पांच फीट तक पानी बहता रहा। इसके चलते आसपास के इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ।
रेहुटा, किचवारिया, इटौर, मैनपुरा, अकौना, रजरवार, खम्हरिया, टिकरी, रगौली और सोहास समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि लोग पूरी रात घरों की छतों पर बैठे रहे। कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण ली।
सांसद के आवास तक पहुंचा बाढ़ का पानी
बाढ़ का असर सतना के खम्हरिया इलाके में भी देखने को मिला, जहां सांसद गणेश सिंह के आवास तक पानी पहुंच गया। सांसद ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
रात दो बजे NDRF ने किया रामजी मिश्रा का रेस्क्यू
रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बम्हरौला बड़ी पतारी टोला में 42 वर्षीय रामजी मिश्रा बाढ़ के पानी के बीच अपने घर में फंस गए थे। देर रात करीब दो बजे NDRF की टीम ने ग्रामीणों की मदद से उनका सुरक्षित रेस्क्यू किया। राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, SDM, तहसीलदार और थाना प्रभारी की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बिजली और सड़क व्यवस्था को भी भारी नुकसान
बाढ़ के पानी में कई ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे डूब गए, जिसके कारण खम्हरिया और अबेर फीडर से जुड़े करीब एक दर्जन गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। कई इलाकों में बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें काम कर रही हैं।
वहीं, सतना-सेमरिया मार्ग पर ऊधव धाम के पास पुल की रेलिंग टूट गई। बिरसिंहपुर-खडौरा-खडौरी-नगवर मार्ग का प्रमुख पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। चित्रकूट-सतना मार्ग की एक पुलिया क्षतिग्रस्त होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। यात्रियों से वैकल्पिक रूप से नागौद-कालिंजर मार्ग का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।
पानी उतरने लगा, लेकिन नुकसान का आकलन बाकी
शनिवार रात के बाद रविवार तड़के से सेमरावल नदी का जलस्तर कम होने लगा, जिसके बाद कुछ इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली और धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौटना शुरू किया। हालांकि बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही तबाही का मंजर सामने आ रहा है।
कई जगह सड़कें, पुलिया, बिजली के खंभे और मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। उचेहरा के पिपरी कलां में नौपुला जलमग्न होने के कारण दो गांवों का संपर्क अभी भी बाधित है। ग्रामीणों के रेलवे पटरी पार कर आवागमन करने से हादसे का खतरा बना हुआ है। प्रशासन की प्राथमिकता अब प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने, बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने और लोगों को राहत पहुंचाने की है।
