3,168 कुत्तों की नसबंदी, फिर भी कुत्ते बेहिसाब! 33 लाख के हिसाब पर उठे सवाल

Khandwa Stray Dogs: मध्य प्रदेश के खंडवा में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या और काटने की घटनाओं से परेशान होकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष…

Khandwa Stray Dogs: मध्य प्रदेश के खंडवा में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या और काटने की घटनाओं से परेशान होकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने अनोखा विरोध (Khandwa Stray Dogs) का रास्ता अपनाया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित होने वाली साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान वे एक व्यक्ति को ‘छद्म कुत्ते’ (डॉग कॉस्ट्यूम) की वेशभूषा पहनाकर अपने साथ लेकर पहुंचे। इस अछूते और प्रतीकात्मक प्रदर्शन को देखकर वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और जिले भर से अपनी समस्याएं लेकर आए आम लोग हैरान रह गए। परिसर में हर कोई इस नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करता नजर आया।

नसबंदी अभियान और लाखों रुपये के खर्च पर गंभीर सवाल
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम के अधिकारियों पर श्वान नसबंदी के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया। आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में निगम द्वारा 3,168 कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया था, जिसके एवज में सरकारी खजाने से 33 लाख 20 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि निकाली गई। प्रति कुत्ता औसतन 1,048 रुपये का खर्च दिखाया गया, जबकि धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। उनका सवाल था कि अगर इतनी बड़ी संख्या में नसबंदी हुई है, तो शहर के हर वार्ड में आवारा कुत्तों की आबादी कम होने के बजाय इतनी तेजी से कैसे बढ़ रही है?

चार साल में 13 हजार से अधिक लोग बने डॉग बाइट का शिकार
अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी बताया गया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा शहर के लगभग 13,225 नागरिक आवारा कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे हैं। आवारा श्वानों के इस निरंतर खौफ के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा शहर में आवारा कुत्तों के साथ-साथ सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशियों के कारण आए दिन रात के समय गंभीर सड़क हादसे भी हो रहे हैं, जिससे आम जनता में नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी असंतोष व्याप्त है।

टेंडर प्रक्रिया की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
प्रशासन के समक्ष यह मामला उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि नसबंदी योजना के तहत हुए पूरे खर्च का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराया जाए। इसके साथ ही टेंडर प्रक्रिया, संबंधित कार्य करने वाली एजेंसी की पात्रता और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मौके पर जाकर नसबंदी किए गए कुत्तों के भौतिक सत्यापन और नियमों के विरुद्ध काम सौंपने वाले दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात कही गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर काशीराम बડોले ने प्राप्त शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।