Chhattisgarh Anti Conversion Law: छत्तीसगढ़ में अब यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला प्रशासन को इसकी जानकारी (Chhattisgarh Anti Conversion Law) देनी होगी। राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में नियमों को अधिसूचित किए जाने के बाद ‘छत्तीसगढ़ धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ को औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इस अधिसूचना के साथ ही राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून प्रभावी हो गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य एक स्पष्ट और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के जरिए अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
कानून का ढांचा और अवैध धर्मांतरण पर सख्ती
सरकार का दावा है कि इस नए कानून से अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में 4 अगस्त 2026 को इस अधिनियम की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई थी। इस नए अधिनियम में कुल चार भाग और 24 धाराएं शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जबरन, लालच देकर, धोखे से या दबाव डालकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना है।
नए नियमों के तहत बदलाव और घोषणा प्रक्रिया
नए नियमों के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को स्वयं अपनी स्वेच्छा से घोषणा करनी होगी। प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि यदि किसी को कोई आपत्ति हो, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति दर्ज करा सके। इसके अलावा, धर्म परिवर्तन कराने वाले धर्मगुरु या संबंधित व्यक्ति के लिए भी सक्षम अधिकारी को पहले से सूचित करना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर उसे सुधारने का प्रावधान भी रखा गया है।
विवाह और विदेशी फंडिंग को लेकर कड़े प्रावधान
यह नया कानून विवाह से जुड़े धर्म परिवर्तन के मामलों पर भी सख्ती से लागू होता है। सरकार के अनुसार, केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए गए विवाहों को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा, अवैध धर्मांतरण के मामलों में विभिन्न संगठनों की भूमिका और विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) की गहन जांच करने का विशेष प्रावधान भी किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से अंकुश लगाएगा।
