दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में लगी भीषण आग में बच्चों समेत सात लोग जल कर हो गए राख

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लोगों कड़ी मेहनत करते हो और अपना दिन गुजारते हैं और शाम को बड़े-बड़े सपने देखते हैं। आज हम ऐसी की एक कहानी आपको बताने जा रहे हैं। जीवन की तमाम मुश्किलों का सामना करने के बावजूद उनके चेहरे पर खुशी छाई हुई थी। लेकिन कुछ परिवार के लिए काली रात साबित हुई या रात। बच्चों सहित सात लोग भी चल कर मर गए। और दूसरे कई परिवारों के घर भी जल गए।

सर्वत्र दु:ख और विनाश के लक्षण :
राजधानी दिल्ली के गोकुलपुर गांव की झुग्गियों में शुक्रवार देर रात आग लग गई लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे। हादसे के वक्त ज्यादातर लोग सो रहे थे। अचानक हुई आवाज से वे लोग भी जाग गए और भागने लगे। चौबे बाहर निकले तो देखा कि आग पूरी झुग्गियों में फैल चुकी है। फिर वहां की महिलाओं ने जो बच्चे सो रहे थे उन सब को उठाया और वहां से बाहर निकालने की कोशिश करने लगे और इस कोशिश में सब लोग कामयाबी रहे।

बाहरी लोगों ने पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। लेकिन, वह फेल हो गया। लोगों के पास अनपैक करने का भी समय नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 15 से 20 मिनट तक लोगों ने खुद ही आग बुझाने का प्रयास किया।ज्यादातर झुग्गियों में रखे ज्वलनशील पदार्थ लोगों की मंशा को कामयाब नहीं होने दे रहे थे और आग लगातार हावी होती रही।वहीं रहने वाले सुनील ने बताया कि अमरपाल और मोनू पंडित नाम के शख्स के पास दो प्लॉट हैं। इस पर अमरपाल और मोनू ने झुग्गी बना ली है। प्रत्येक झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों से 1200 से 1500 तक किराया वसूला जाता है। यहां किराए के बदले बिजली भी दी जाती है।

शुक्रवार रात 12.30 बजे से 12.40 बजे के बीच राजन की झोपड़ी के पास रवि की झोपड़ी में आग लग गई। आग लगने के कारणों का पता नहीं चला है। कुछ लोगों का कहना है कि पहली आग बिजली के तार में शॉर्ट सर्किट से लगी थी।

इसके बाद दोनों भूखंडों में मलिन बस्तियों का क्रमिकआग लग गई। आग लगने के बाद पिंटू भी अपने बच्चों के साथ बाहर निकल गई, लेकिन उसके दो बड़े बच्चे डर के मारे किरण की झोपड़ी में छिप गए। आग इतनी भीषण थी कि पिंटू बच्चों को बाहर नहीं निकाल पाया। हंगामे के बीच दोपहर 1.10 बजे दमकल की गाड़ियां पहुंचने पर आग ने 33 झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया।

राजन के बेटे बबलू (30), रंजीत (17), बेटी रेशमा (16), बेटे सुजीत की गर्भवती पत्नी प्रियंका (22) और बबलू के बेटे अमित उर्फ ​​शहंशाह (11) की मौत उन्नाव (उत्तर प्रदेश) गांव की मलिन बस्तियों से हुई।रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्नाव के खेड़ा गांव निवासी पिंटू अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ फरार हो गया, जबकि पिंटू की बेटी दीपिका (8) और बेटा रोशन (12) जान बचाने के लिए पड़ोसी की झोपड़ी में घुस गए, जिसमें आग लग गई। जिससे उसकी मौत हो गई। आमतौर पर राजन की पत्नी मुन्नी देवी और बेटे सुजीत थोड़े-थोड़े जल गए थे।