जानिए गुजरात की रानी नायकी देवी के बारे में, जिनसे मोहम्मद गोरी डरकर भाग निकला

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हाल के दिन में बहुत वायरल हो रही फिल्म नायका देवी के बारेमे बताने वाले है की उसने केसे अपने दुश्मनोको अपने पैरो के निचे दबा कर रखा| आज हम बात कर रहे हैं गुजरात के एक वीरांगना की जिसके हाथ से मोहम्मद गोरी हार कर गुजरात छोड़ गया था। गुजरात में सिद्धराज जयसिंह के बाद कुमारपाल और उनके पुत्र अजयपाल ने शासन किया। अजयपाल के अंगरक्षक ने 19 में एक बार अजयपाल की हत्या कर दी थी। उसके बाद अजयपाल की पत्नी नायकी देवी गुजरात का सौपान संभाल रही थीं।

नायिका देवी कदम राज्य के महामंडलेश्वर परमांडी के पुत्र थे। अजयपाल की मृत्यु के बाद, राज्य नायक देवी को सौंप दिया गया था। जब मोहम्मद गोरी को पता चला कि गुजरात में एक विधवा रानी का शासन है, तो उसने गुजरात पर आक्रमण करने का फैसला किया।इस तरफ नायका देवी भी तैयार ही थी| इसलिए उसने उत्तर की ओर एक पहाड़ी क्षेत्र में लड़ने का फैसला किया। क्योंकि अगर युद्ध में नायकी देवी की हार हुई तो गुजरात की महिलाओं के पास जीवित रहने का समय होगा, इसलिए उन्होंने युद्ध के लिए पहाड़ी क्षेत्र को चुना।

तब मोहम्मद गोरी ने नायकीदेवी को संदेश भेजा कि, गुजरात के राजपूतों से कहो कि वे अपनी औरतें और सोना हमें सौंप दें और अगर वह ऐसा करते हैं, तो उनकी जान बच जाएगी। तब नायकदेवी ने उत्तर दिया कि गोरी से कहो कि यदि आप द्वारकाधीश गए हैं और संध्या आरती करने के लिए तैयार हैं, तो हम आपको पुरस्कृत करेंगे।

मोहम्मद गोरी ने नायकी देवी को एक कमजोर महिला माना और कहा कि वह जल्द ही नायकी देवी की सेना पर विजय प्राप्त करेगा। उसे पता चला कि मोहम्मद गोरी ने जहां डेरा डाला था, वहां से कुछ ही दूरी पर एक बख्तरबंद घुड़सवार आ रहा था। जब वह पास पहुंचा, तो वह घुड़सवार नहीं था, बल्कि एक महिला थी जिसके बच्चे की पीठ पीछे बंधी हुई थी।

इससे पहले कि मोहम्मद गोरी कुछ समझ पाते, हजारों घुड़सवारों ने सेना को तीन तरफ से घेर लिया। नायकदेवी अपने दोनों हाथों में तलवार लेकर सेना को समाप्त कर रही थी। गोरी ने उसका सामना करने की कोशिश की लेकिन राजपूतों के जुनून के खिलाफ मोहम्मद गोरी को कुछ नहीं हुआ और गोरी ने अपने अंगरक्षक के साथ मैदान से भागने का फैसला किया। और उस फेसले से सबकुछ एकदम पलट गया|

मुहम्मद गोरी को भागते देख नायक देवी ने उनके पीछे एक भाला फेंका लेकिन वह उन्हें टक्कर मारकर घोड़े पर सवार होकर भाग निकले। उसने अपने अंगरक्षक से कहा कि अगर मैं घोड़े पर सोता भी हूं तो वह घोड़े को फंसने देगा और अगर घोड़ा सामने रुक गया तो वह मुझे दूसरे घोड़े पर बिठाकर घर ले जाएगा। और गुजरात में इस अनुभव के बाद, उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी गुजरात की ओर देखा तक नहीं था| और जब भी उसके सामने कोई गुजरात की बात करता था तो उनको रुका देता था और बात को टाल देता था| इस हद तक वो नायका देविसे डरने लगा था|