Bihar Boat Accident: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में एक भीषण नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार देर रात गंगा नदी में नाव (Bihar Boat Accident) पलटने से 13 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
खुशियों से निकला सफर बना अंतिम यात्रा
राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद गांव में उस समय कोहराम मच गया, जब वहां के निवासी रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस एक ही परिवार के 7 बच्चे खुशी-खुशी भोज खाने के लिए घर से निकले थे। परिजनों ने उन्हें हंसते-मुस्कुराते हुए विदा किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनके बच्चों की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सूनापन बचा है।
जर्जर नाव और प्रशासनिक लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
हादसे के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस नाव से बच्चे और लोग आवाजाही कर रहे थे, वह बेहद पुरानी और जर्जर स्थिति में थी। लोगों का दावा है कि इस जर्जर नाव को बदलने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दिया गया था, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने नई नाव उपलब्ध कराई होती, तो इस भीषण त्रासदी को टाला जा सकता था।
अस्पताल की बदहाली और डीएम का विरोध
घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए संबंधित अंचल अधिकारी (CO) के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलते हुए बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक ही डॉक्टर मौजूद थे, और मौके पर न तो एंबुलेंस थी और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर जैसी बुनियादी सुविधाएं। व्यवस्थाओं की इस बदहाली और अधिकारियों की लाचारी से नाराज लोगों ने जिलाधिकारी (DM) का जमकर विरोध किया और नारेबाजी की, जिसके चलते उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ा।
गांव में पसरा मातम और शवों को रोकने का आक्रोश
फिलहाल सभी 13 बच्चों के शवों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है। न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने अभी तक शवों को उठाने नहीं दिया है। तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर की यह घटना आज हर संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर रही है, और पीछे छोड़ गई है सिर्फ रोते-बिलखते परिवार और कभी न भरने वाला खालीपन।
