उत्तराखंड में कुदरत का कहर: भारी बारिश और भूस्खलन से 12 से ज्यादा की मौत, 172 सड़कें बंद

Uttarakhand Heavy Rain: उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाकों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं।…

Uttarakhand Heavy Rain: उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाकों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। बारिश और भूस्खलन (Uttarakhand Heavy Rain) की घटनाओं के चलते अब तक 12 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि प्रशासन और राहत टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

मौसम विभाग ने 2 सितंबर को उत्तराखंड के सभी जिलों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना जताई है। देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर के कुछ इलाकों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, ऑरेंज अलर्ट वाले इलाकों में तेज गरज-चमक के साथ आंधी और तेज से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं, राज्य के बाकी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

प्रशासन ने लोगों से नदियों और बरसाती नालों के आसपास नहीं जाने की अपील की है। मौसम खराब होने और बिजली कड़कने के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक पानी का बहाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

172 सड़कें बंद, आवाजाही प्रभावित
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्यभर में दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत कुल 172 सड़कें बंद हैं। इनमें अल्मोड़ा की 23, बागेश्वर की 11, चमोली की 17 और चंपावत की 2 सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा देहरादून में 15, नैनीताल में 40, पौड़ी में 12, पिथौरागढ़ में 12, रुद्रप्रयाग में 11, टिहरी में 15 और उत्तरकाशी में 14 सड़कें बंद हैं। सड़कों के बंद होने से कई इलाकों में लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भीमताल में पहाड़ टूटने से दहशत
भीमताल के पांडे छोरा गांव में पहाड़ टूटने के बाद स्थिति चिंताजनक हो गई है। पहाड़ से लगातार पानी और मलबा नीचे की ओर आ रहा है, जिसके कारण कई घरों में पानी और मलबा घुस गया है। अचानक आई इस आपदा के कारण स्थानीय लोगों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की स्थिति पैदा हो गई है। भारी बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्र में हुई इस घटना से ग्रामीणों में डर का माहौल है।

सितारगंज में सबसे ज्यादा 180 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटे में सितारगंज में सबसे ज्यादा 180 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा नैनीताल के चोरगलिया में 154 मिमी, देहरादून के मालदेवता में 133 मिमी और अल्मोड़ा में 107 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। चंपावत में 105 मिमी, जबकि पिथौरागढ़ के देवलथाल में 90 मिमी बारिश दर्ज की गई।

नदियों का जलस्तर खतरे के करीब
लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड की कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शाम 6 बजे तक उत्तरकाशी में भागीरथी नदी और चमोली में नंदाकिनी तथा पिंडर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया था। वहीं, शाम 4 बजे तक रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर भी खतरे के बेहद करीब पहुंच गया।

हरिद्वार में भी गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा है। शाम 6 बजे तक गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया था। लगातार बारिश को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।

फिलहाल उत्तराखंड में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है। भारी बारिश, भूस्खलन, बंद सड़कों और बढ़ते नदी के जलस्तर के कारण राज्य के कई हिस्सों में चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन की ओर से लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की जा रही है।