दूध नहीं जहर पी रहे हैं आप, शैम्पू से दूध बनाकर करोड़पति हो गए दो भाई

दूध नहीं जहर पी रहे हैं आप, शैम्पू से दूध बनाकर करोड़पति हो गए दो भाई

आमतौर पर दूध को हमारे स्वास्थ्य के लिए संपूर्ण आहार माना जाता है और बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसका खाने और पीने में कई तरह से इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है जो पैकेट बंद दूध आप घर ला रहे हैं और पी रहे हैं दरअसल में वो जहर है. पुलिस ने दो ऐसे भाइयों को गिरफ्तार किया है जो शैम्पू से दूध बनाकर बेचते थे और इससे सिर्फ 7 सालों में करोड़पति बन गए. (सभी तस्वीरें सांकेतिक हैं)

दरअसल मध्य प्रदेश के मुरैना में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने देवेंद्र गुर्जर और जयवीर गुर्जर नाम के दो भाइयों को गिरफ्तार किया है जिन पर बीते कई सालों से सिंथेटिक (नकली) दूध बनाकर बेचने का आरोप है. इतना ही नहीं दोनों भाइयों ने इस नकली दूध के धंधे से इतना पैसा कमाया कि वो सिर्फ 7 साल में ही तीन बंगले, कई एसयूवी, मिल्क टैंकर, खेती की जमीन, और दो पैकेट बंद दूध की फैक्ट्री के मालिक बन गए.

STF के मुताबिक दूध के रूप में जहर बेच रहे ये दोनों भाई सात साल पहले तक मुरैना के डेयरी फॉर्म में अपनी बाइक से दूध पहुंचाते थे. दूध के धंधे में भारी मुनाफा देखकर इन दोनों भाइयों ने सिंथेटिक (नकली) दूध बनाने का काला धंधा शुरू कर दिया.

दोनों भाई ग्लूकोज, यूरिया, रिफाइंड तेल, मिल्क पाउडर, पानी और शैम्पू से सिंथेटिक दूध बनाते थे और फिर उसे न सिर्फ मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बल्कि दूसरे राज्यों में भी भेजा करते थे. एसटीएफ को जांच में इस काम में शामिल हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की नामी कंपनियों का भी  पता चला है.

नकली दूध के इस काले धंधे में देवेंद्र गुर्जर के साथ ही चंबल के कुछ अन्य डेयरी मालिकों का भी नाम  एफआईआर में शामिल किया गया है जो केवल पांच-सात साल में अमीर हो गए. इन लोगों पर  मध्य प्रदेश के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की नामी कंपनियों को भी सिंथेटिक दूध बेचने का आरोप है.

इस बेहद गंभीर मसले को लेकर एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राजेश भदोरिया ने कहा, ‘जांच के दौरान, मुख्य आरोपियों में से छह लोगों  देवेंद्र गुर्जर, जयवीर गुर्जर, रामनरेश गुर्जर, दिनेश शर्मा, संतोष सिंह और राजीव गुप्ता  के पास बड़ी संपत्ति थी. उनके जीवन स्तर में कुछ ही वर्षों में पूरी तरह से बदलाव आया है. उन्होंने छोटे डेयरी मालिकों से करोड़पति बनने तक के सफर को बहुत तेजी से कवर किया.  वे एक लीटर दूध बनाने के लिए सिर्फ 6 रुपये खर्च करते थे, जो थोक बाजार में 25 रुपये में बिकता है. लाभ मार्जिन लगभग 70-75% है. वे ग्लूकोज, यूरिया, रिफाइंड तेल, दूध पाउडर और पानी को मिलाकर सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं. इसी तरह, सिंथेटिक पनीर और मावा के लिए लाभ मार्जिन बढ़ा दिया था.’

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