अगर एसा हुआ तो सलमान खान को १७ जून को फिर से जाना होगा जेल

अगर एसा हुआ तो सलमान खान को १७ जून को फिर से जाना होगा जेल

जोधपुर, जेएनएन। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के झूठे शपथ पत्र पेश किए जाने के खिलाफ लगाए गए प्रार्थना पत्रों पर मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर की अदालत में सुनवाई पूरी हो गई। अदालत अब इस मामले में 17 जून को अपना फैसला सुनाएगी कि इस मामले में सलमान के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए या नहीं। यदि आदेश में उनको दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान सलमान खान के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि सलमान खान का किसी भी तरह का यह मंतव्य नहीं था कि वह झूठा शपथ पत्र दे, ऐसे में उसके विरुद्ध किसी तरह की कार्यवाही करना न्यायोचित नहीं है।

जानें, क्या है मामला

आर्म्स एक्ट मामले में बरी हो चुके सलमान खान के खिलाफ सरकार की ओर से सीआरपीसी की धारा 340 के तहत दो प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किए गए थे। सलमान खान ने आर्म्स एक्ट मामले की ट्रायल के दौरान एक शपथ पत्र पेश किया था कि उसके हथियार का लाइसेंस गुम हो गया है, जबकि इसी दौरान हथियार का लाइसेंस मुंबई में नवीनीकरण के लिए पेश किया गया था। ऐसे में अभियोजन पक्ष ने सीआरपीसी की धारा 340 के तहत आरोप लगाया था कि सलमान ने झूठा शपथ पत्र पेश करते हुए कोर्ट को गुमराह किया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान सलमान को अपना लाइसेंस कोर्ट में जमा करवाना था लेकिन सलमान की तरफ से शपथ पत्र देकर बताया गया कि उसका लाइसेंस खो गया, जबकि लाइसेंस नवीनीकरण के लिए दिया हुआ था। अभियोजन ने इस शपथपत्र को झूठा बताते हुए कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 340 के तहत कार्यवाही करने का प्रार्थना पत्र 2006 में पेश किया था।

इसी तरह दूसरे पत्र में सुनवाई पर गैर हाजिर रहे सलमान की ओर से कान में दर्द होने का बहाना कर शपथ पत्र दाखिल किया गया था, जबकि अभियोजन पक्ष ने अदालत में उस दिन सलमान के बजरंगी भाईजान की शूटिंग में व्यवस्त होने का प्रमान दिया गया और सलमान के द्वारा अदालत में झुठा शपथ पत्र देने की बात कही। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद मंगलवार को इस पर आदेश की तिथि 17 जून तय की है।

जानें, क्या है सजा का प्रावधान

झूठे शपथ पत्र तथा झूठी गवाही देने पर ऐसे गवाहों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत सरकार अदालत में शिकायत करती है। ऐसे गवाह के खिलाफ अदालत में झूठा बयान देने के मामले में आइपीसी की धारा 193 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात साल कैद की सजा का प्रावधान है।

वर्ष 1998 से जुड़ा है मुख्य माम

वर्ष 1998 में जोधपुर में अपनी फिल्म हम साथ-साथ है की शूटिंग के दौरान सलमान खान के खिलाफ हिरण शिकार के तीन व आम्र्स एक्ट का एक प्रकरण दर्ज किया गया था। आर्म्स एक्ट में उन्हें गत वर्ष बरी कर दिया गया। तीन मामलों में कोर्ट ने सलमान को दोषी करार देते हुए सजा सुना रखी है। इसमें से एक मामले में हाईकोर्ट से उन्हें बरी कर दिया गया, जबकि शेष अन्य दो मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट से सलमान को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है।

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